संक्षेप में: नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेला 2027-28 की शुरुआत 31 अक्टूबर 2026 को ध्वजारोहण नामक औपचारिक ध्वज फहराने के समारोह से होती है। समाचारों के अनुसार यह पंचवटी के रामकुंड पर दोपहर के आसपास होगा। मुख्य अमृत स्नान के दिन बाद में 2027 में आते हैं।
ध्वजारोहण क्या है?
ध्वजारोहण का अर्थ है "ध्वज फहराना"। कुंभ परंपरा में पवित्र ध्वज फहराना शहर और अखाड़ों के लिए कुंभ काल की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक है। यह धार्मिक और नागरिक समारोह है, स्नान का दिन नहीं।
तिथि, स्थान और समय
- तिथि: 31 अक्टूबर 2026।
- स्थान: रामकुंड, पंचवटी, नासिक, राज्य की घोषणाओं के समाचारों के अनुसार।
- समय: लगभग दोपहर 12:02 बताया गया है। सटीक समय और कार्यक्रम का क्रम प्रशासन घोषित करता है, इसलिए दिन के करीब पुष्टि कर लें।
ध्वज फहराने के बाद क्या होता है?
इसके बाद कुंभ काल 24 जुलाई 2028 तक चलता है। साधुग्राम जैसे शिविरों में साधु और अखाड़े आने लगते हैं, और साल भर तैयारी जारी रहती है। बड़े स्नान दिन, अमृत स्नान, 2 अगस्त, 31 अगस्त, 11 सितंबर और 12 सितंबर 2027 को हैं। पूरी सूची हमारी कुंभ तिथियाँ गाइड में पढ़ें और उस दिन का अर्थ अमृत स्नान गाइड में जानें।
क्या ध्वजारोहण के लिए जाना चाहिए?
यदि आप नासिक में या पास रहते हैं, तो स्नान दिनों की बहुत बड़ी भीड़ के बिना कुंभ की शुरुआत देखने का यह अच्छा अवसर है। रामकुंड पर भीड़ की संभावना है और उस दिन कुछ सड़कें प्रतिबंधित हो सकती हैं। यदि आप दूर से आ रहे हैं, तो आप 2027 के मुख्य स्नान दिनों की योजना बनाना पसंद कर सकते हैं।
यात्रियों के लिए सुझाव
- यात्रा से पहले यातायात और प्रवेश व्यवस्था की आधिकारिक सूचनाएँ देखें। हमारा अपडेट पृष्ठ उन्हें एक जगह देता है।
- पंचवटी जल्दी पहुँचें, और पानी, पहचान पत्र और हल्के बैग साथ रखें।
- ठहरने की व्यवस्था जल्दी बुक करें, क्योंकि आयोजनों के आसपास होटल और धर्मशालाएँ जल्दी भर जाती हैं।
- यात्रा के लिए नासिक कैसे पहुँचें देखें। पूरा कार्यक्रम और रामकुंड गाइड देखें।