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ब्रह्मगिरि पर्वत त्र्यंबकेश्वर: गोदावरी उद्गम, चढ़ाई और कुंभ 2027 के लिए गाइड

ब्रह्मगिरि पर्वत त्र्यंबकेश्वर: गोदावरी उद्गम, चढ़ाई और कुंभ 2027 के लिए गाइड

चित्र: The MH15, CC BY-SA 4.0, Wikimedia Commons

संक्षेप में: ब्रह्मगिरि त्र्यंबकेश्वर के पीछे का हरा पर्वत है, जहाँ से परंपरा के अनुसार गोदावरी नदी का उद्गम होता है। श्रद्धालु नदी का उद्गम देखने यहाँ आते हैं, आमतौर पर त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग और कुशावर्त कुंड के साथ उसी यात्रा में।

ब्रह्मगिरि क्या है?

ब्रह्मगिरि सह्याद्रि पर्वतमाला में त्र्यंबकेश्वर के पास का पर्वत है, जो नासिक से लगभग 28 से 30 किमी दूर है। बारिश के बाद इसकी ढलानें हरी-भरी हो जाती हैं, और चढ़ने की इच्छा रखने वालों के लिए नगर से पत्थर की सीढ़ियों का रास्ता ऊपर जाता है।

गोदावरी का उद्गम यहीं क्यों?

गोदावरी को दक्षिण गंगा कहा जाता है। परंपरा के अनुसार ऋषि गौतम की प्रार्थना पर नदी ब्रह्मगिरि से प्रवाहित हुई। पूरी कथा हमारे लेख गोदावरी को दक्षिण गंगा क्यों कहते हैं में पढ़ें।

गंगाद्वार और चढ़ाई

उद्गम स्थल पर्वत पर गंगाद्वार नाम से प्रसिद्ध मंदिर से चिह्नित है। कई श्रद्धालु सीढ़ियाँ चढ़कर वहाँ पहुँचते हैं। चढ़ाई में मेहनत लगती है, इसलिए लोग आमतौर पर कुछ घंटे का समय रखते हैं और जल्दी शुरू करते हैं।

मौसम के अनुसार योजना

कुंभ मेले के दिन बरसात के मौसम में आते हैं। पर्वत पर सीढ़ियाँ गीली और फिसलन भरी हो सकती हैं और बादलों से दृश्यता कम हो सकती है। मज़बूत जूते पहनें, पानी साथ रखें और भारी बारिश में न चढ़ें। जाने से पहले स्थानीय सलाह देख लें।

कुंभ के लिए यात्रा सुझाव

  • हमारी त्र्यंबकेश्वर गाइड में ब्रह्मगिरि को ज्योतिर्लिंग और कुशावर्त कुंड के साथ जोड़ें।
  • दोपहर की भीड़ और मौसम से पहले उतर आने के लिए जल्दी शुरू करें।
  • बुज़ुर्ग और छोटे बच्चे चढ़ाई के बारे में सोच-समझकर निर्णय लें।
  • अमृत स्नान के दिन, 2 अगस्त, 31 अगस्त, 11 सितंबर और 12 सितंबर 2027, त्र्यंबकेश्वर में बहुत भीड़ होगी। कार्यक्रम देखें।
  • बाहर से आ रहे हैं? नासिक और त्र्यंबकेश्वर कैसे पहुँचें पढ़ें।